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Landscape vs Potraits

दोस्तों आज हम जानेंगे कि लैंडस्केप और पोट्रेट फोटोग्राफी में क्या अंतर है।


इसके लिए सबसे पहले हम संक्षेप में इन दोनों में अंतर समझ लेते हैं। तो आइए सबसे पहले पोट्रेट के बारे में मैं आपको कुछ बताता हूं ।
दोस्तों साधारणतया पोट्रेट फोटोग्राफी किसी व्यक्ति विशेष , वस्तु विशेष के बारे में इस प्रकार से की जाती है । फोटो का फ्रेम इतना रखा जाता है कि मुख्यतः  पूरी फोटो में वह व्यक्ति विशेष ही दिखाई दे । सामान्यता शादी विशेष में की जाने वाली फोटोग्राफी इस श्रेणी में आती है । यानी कि व्यक्ति विशेष ही फोकस में रहे ।
जबकि इसके विपरीत लैंडस्केप फोटोग्राफी में फ्रेम बड़ा होता है तथा इसमें फोटोग्राफर का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक चीजें दिखाने का होता है । सामान्यतः लैंडस्केप फोटोग्राफी में नेचर की फोटोग्राफी आती है । इसे हम यूं समझ सकते हैं कि इसमें पहाड़ ,नदी ,बादल इन तीनों ही चीजों को एक ही फोटो में फोटोग्राफर कैद करने की कोशिश करता है । हालांकि लैंडस्केप  फोटोग्राफी में बड़ी-बड़ी बिल्डिंग्स की फोटोग्राफी भी की जाती है  । मसलन जहां एक बहुत बड़ा पुल आप अपने फोटो में कवर करते हैं ,जिसमें पुल के नीचे से गुजरने वाली नदी भी आपके फोटो में आती है । वहां भी इस प्रकार के फोटो लैंडस्केप फोटोग्राफी कहलाती हैं ।
दोस्तों अब आप यह सोच रहे होंगे कि बड़े फ्रेंड की फोटो खींचकर उस पर से छोटा फ्रेम कंप्यूटर या मोबाइल से क्रॉप भी किया जा सकता है । आप सही हैं
लेकिन  मैं आपको यह सलाह दूंगा कि आप क्रॉप करने के बजाय कैमरा से ही फोटो का फ्रेम डिसाइड करें ।
दोस्तों लैंडस्केप और पोट्रेट फोटोग्राफी में केवल फ्रेम साइज बड़ा छोटे होने का ही अंतर नहीं है  । इन दोनों ही फोटोग्राफी में कैमरा की सेटिंग में भी बिल्कुल से परिवर्तन हो जाता है ।
दोस्तों इस लेख से आपको तो डेप्थ ऑफ फील्ड के बारे में भी जानने का अवसर मिलेगा । Landscape photography डेप्थ ऑफ फील्ड ज्यादा रखी जाती है जबकि पोट्रेट में डेप्थ ऑफ फील्ड कम रखी जाती है ।
डेप्थ ऑफ फील्ड पर हमारा वीडियो देखे ।
डेप्थ ऑफ फील्ड उस एरिया को कहते हैं जो फोकस में रहता है और जो ब्लर नहीं रहता ।
डेप्थ ऑफ फील्ड बढ़ाने  के लिए यानी  ज्यादा एरिया फोकस में रखने के लिए हमें aprature का एफ प्वॉइंट बढ़ाना पड़ता है । ऐसा अक्सर लैंडस्केप फोटोग्राफी में किया जाता है ।
यदि हमें केवल किसी व्यक्ति विशेष को ही फोकस में रखना है तथा पीछे के बैकग्राउंड को ब्लर करना है अर्थात हमें हमारे मैं डेप्थ ऑफ फील्ड को केवल व्यक्ति विशेष तक रखना है तो इसके लिए एफ प्वॉइंट कम कर देने से हमें कम डेप्थ  ऑफ फील्ड मिलती है । कम डेप्थ  ऑफ फील्ड  को शैलो डेप्थ  ऑफ फील्ड कहा जाता है । ऐसा अक्सर पोट्रेट फोटोग्राफी में किया जाता है ।
मोबाइल से बैकग्राउंड ब्लर कैसे करें इस पर हमारा वीडियो देखें ।
इस प्रकार इन दोनों फोटोग्राफी में एक और अंतर यह है कि लैंडस्केप फोटोग्राफी में फोटोग्राफर अपनी डेप्थ ऑफ फील्ड को ज्यादा रखता है जबकि पोट्रेट फोटोग्राफी में डेप्थ ऑफ फील्ड कम रखी जाती है ।
लैंडस्केप फोटोग्राफी में डेप्थ ऑफ फील्ड इसलिए ज्यादा रखी जाती है क्योंकि ज्यादा से ज्यादा चीजें फोटो में दिखाई दे। और पोट्रेट फोटोग्राफी में ऐसे कम इसलिए रखी जाती है ताकि व्यक्ति विशेष फोकस में रहे तथा पीछे की चीजें ब्लर आए और केवल हमारा ऑब्जेक्ट ही फोकस में नजर आए ।
इसी से हमें इन दोनों के मध्य एक और अंतर जानने को मिलता है । वह यह है कि पोर्ट्रेट फोटोग्राफी में व्यक्ति विशेष ब्लर देने की कोशिश करता है । जबकि लैंडस्केप फोटोग्राफी में ब्लर इफेक्ट कम होता है ।
फोटो में ब्लर बनाने के लिए  पोट्रेट फोटोग्राफी में अपने अप्रेचर का एफ प्वाइंट कम रखा जाता है जबकि  लैंडस्केप फोटोग्राफी में aprature का एफ पॉइंट 12 या 13 के आसपास यानी ज्यादा रखा जाता है ।
शैलो डेप्थ  ऑफ फील्ड या ज्यादा ब्लर केसे ले इसके लिए कुछ अन्य ट्रिक्स भी है जिसके लिए हमारा वीडियो देखे ।
क्योंकि पोट्रेट फोटोग्राफी में हम एफ प्वाइंट कम रखते हैं । इसलिए हमेशा शटर स्पीड बढ़ानी पड़ती है ताकि आप की फोटो overexposed  ना हो। जबकि लैंडस्केप फोटोग्राफी में हमेशा ही शटर स्पीड बहुत कम रखी जाती है और एफ प्वाइंट ज्यादा रखा जाता है । ऐसा इसलिए है क्योंकि लैंडस्केप फोटोग्राफी में शटर स्पीड कम रखने से कम रखने से कैमरा में लाइट ज्यादा आती है और चीजें ज्यादा साफ आती है ।
लाइट बैलेंस पर हमारा वीडियो देखें ।
जबकि Portrait photos में शटर स्पीड इसलिए भी थोड़ी ज्यादा रखी जाती है क्योंकि ऐसी फोटोग्राफ बिना ट्राइपॉड के हाथ से लिए जाते हैं ऐसी दशा में यदि शटर स्पीड कम होगी तो फोटो में मूविंग ब्लर आ जाएगा ।
इस प्रकार दोनों में एक अंतर यह भी है कि पोट्रेट फोटोग्राफी आपने लोगों को अपने हाथ  में कैमरा उठाकर फोटोग्राफी करते देखा होगा जैसे कि विवाह समारोह में की गई फोटोज । वहीं दूसरी ओर लैंडस्केप फोटोग्राफी ट्राइपॉड की मदद से की जाती है ।
दोस्तों लैंडस्केप फोटोग्राफी में शटर स्पीड कम रखने का एक और कारण यह भी है कि ज्यादातर लैंडस्केप शाम या सुबह के समय किए जाते हैं जिसमें लाइट कंडीशन कम होती है  । इसे गोल्डन पीरियड भी कहा जाता है । इस वजह से भी शटर स्पीड कम रखने से फोटो ज्यादा अच्छी आती है ।
दोस्तों लैंडस्केप फोटोग्राफी में लॉन्ग exposure में  भी photo किए जाते हैं । इसमें शटर स्पीड अत्यंत कम कर दी जाती है  । मसलन 30 सेकंड के आसपास अर्थात एक फोटो खींचने में ही 30 सेकंड लग जाते हैं ।
लैंडस्केप फोटोग्राफी में ट्राइपॉड की मदद क्यों ली जाती है इसके उत्तर में आपको लैंडस्केप फोटोग्राफी और पोट्रेट फोटोग्राफी का यह अंतर अंतर जानने को मिलेगा ।
लोंग एक्स्पोज़र के लिए हमारा आलेख पढ़े 
लोंग एक्स्पोज़र के लिए हमारा वीडियो देखें ।
दोस्तों पोट्रेट फोटोग्राफी बहुत रफ एंड टफ फोटोग्राफी है ।  इसे करना थोड़ा आसान रहता है । जबकि लैंडस्केप फोटोग्राफी में बहुत ज्यादा स्किल्स की आवश्यकता होती है । इसके लिए आपको पहले से प्लानिंग करनी पड़ती है  । कब फोटो करनी है यह समय तय करना पड़ता है । किस दिशा से एवं किन कंडीशन में फोटो करनी है यह भी तय करना पड़ता है । आपको हमेशा अपने साथ एक ट्राइपॉड रखना पड़ता है । यही नहीं कुछ लैंडस्केप्स बरसात के मौसम में भी किए जाते हैं । इसके लिए आपको अपने डीएसएलआर को पानी से बचाने के लिए गैजेट रखने पड़ते हैं तथा बहुत से फोटोग्राफर लैंडस्केप फोटोग्राफी के समय अंब्रेला का यूज करते हैं । इसी से आप समझ गए होंगे कि लैंडस्केप फोटोग्राफी ट्राइपॉड ,अंब्रेला एवं अन्य इक्विपमेंट की आवश्यकता पड़ सकती है ।
कौन सा ट्राइपॉड बेहतर है इस संबंध में हमारा वीडियो देखें ।
दोस्तों   landscape photography में HDR और bracketing बड़ा महत्व होता है । इसमें फोटोग्राफर एक ही साथ एक से अधिक फोटो लेता है तथा बाद में उन्हें कंप्यूटर की मदद से मर्ज किया जाता है । एक बार क्लिक करने पर ही कैमरा मुख्यतः तीन फोटो लेता है । इसने कैमरा भिन्न-भिन्न एक्स्पोज़र पर ऐसी फोटो करता है ।
HDR photos और  bracketing कैमरा सेटिंग के लिए हमारा वीडियो देखें ।
एचडीआर फोटोज को कैसे मर्ज करें इस संबंध में हमारा वीडियो देखें ।
एक्सपोजर को सेट करने के लिए कैमरा शटर स्पीड को कम ज्यादा करता है  । तथा अलग अलग शटर स्पीड पर अलग फोटो लेता है । इसलिए भी ट्राइपॉड बहुत जरूरी हो जाता है ।
सामान्यतः एचडीआर फोटोग्राफी कैमरा मुख्यतः तीन फोटो लेता है  । जिनमे है हाइलाइट्स  ब्लैक पार्ट्स शैडो रिकॉर्ड करता है। दोस्तों यह तीनों फोटो स्टिल ओर एक ही  स्टेट में आनी चाहिए तथा तीनों फोटो के दौरान कैमरा हिलना नहीं चाहिए इस वजह से भी ट्राइपॉड बहुत जरूरी हो जाता है ।
दोस्तों लैंडस्केप एवं पोट्रेट फोटोग्राफी में एक अंतर यह भी है कि दोनों फोटो करने के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार के लेंस का उपयोग होता है । जहां एक और लैंडस्केप फोटोग्राफी के लिए वाइड एंगल लेंस जैसे कि 10 एमएम  लेंस का उपयोग होता है । वहीं दूसरी ओर पोट्रेट के लिए ज्यादा mm के  उपयोग में लिए जाते हैं । जैसे कि 35 एमएम का लेंस या 50 एमएम का लेंस ।
Lens descriptions के लिए हमारा वीडियो देखें 
कौनसा प्राइम लेंस है बेहतर 24 एमएम 35 एमएम या या 50 एमएम इस संबंध में हमारा वीडियो देखें 
दोस्तों जूम लेंस  मुख्यतः पोर्ट्रेट फोटोग्राफी के लिए ही रखा जाता है । कुछ लोगों का मानना है कि जूम लेंस से भी लैंडस्केप फोटोग्राफी की जा सकती है । लेकिन मैं इससे सहमत  नहीं हूं । क्योंकि जब आप वाइड एंगल लेंस का उपयोग करते हैं तो उसने ज्यादा एरिया फोकस में रहता है यानी डेप्थ ऑफ फील्ड ज्यादा होती है । जबकि जूम लेंस इसका प्रयोग करने में हमें शेलो यानी कम डेप्थ ऑफ फ्रिल्ड   मिलती है  । ज्यादा प्यार मिलता है ।
इस प्रकार पोट्रेट फोटोग्राफी फॉर लैंडस्केप फोटोग्राफी में एक अंतर इस प्रकार भी समझ सकते हैं कि जहां एक और पोट्रेट फोटोग्राफी में शटर स्पीड ज्यादा रखी जाती है और अपने  एफप्वॉइंट कम रखा जाता है वहीं दूसरी ओर लैंडस्केप फोटोग्राफी में शटर स्पीड कम और अपने  एफ पॉइंट थोड़ी ज्यादा रखा जाता है । इसके बहुत से कारण है जिनका ऊपर मैंने विस्तार से विवेचन कर दिया है । लैंडस्केप में क्यों ट्राइपॉड की जरूरत पड़ती है इसके भी बहुत से कारण है जिनका भी मैंने ऊपर विवेचन कर दिया ।

Aprature and aprature mode समझने के लिए हमारा वीडियो देखें
शटरस्पीड और शटर स्पीड मोड समझने के लिए हमारा वीडियो देखें ।

70 300 लेंस आखिर क्यों है एक जबरदस्त लेंस ?  इस पर हमारा वीडियो देखें ।
70 300 लेंस आखिर क्यों है एक जबरदस्त लेंस ?  इस पर हमाराआलेख पढ़े  ।
इस प्रकार दोस्तों लैंडस्केप फोटोग्राफी में पोस्ट प्रोसेसिंग का भी बहुत महत्व है ।

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